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समस्तीपुर में दर्दनाक हादसा, गहरे पानी में डूबने से दो सगी बहनों की मौत

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समस्तीपुर के वारिसनगर थाना क्षेत्र में पानी से भरे गहरे गड्ढे में डूबने से दो सगी बहनों की मौत हो गई। घटना के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है।

समस्तीपुर/आलम की खबर:बिहार के समस्तीपुर जिले से गुरुवार शाम एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। वारिसनगर थाना क्षेत्र के शादीपुर बथनाहा गांव में पानी से भरे गहरे गड्ढे में नहाने गई दो सगी बहनों की डूबने से मौत हो गई। हादसे के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। घटना ने एक बार फिर अवैध मिट्टी कटाई और सुरक्षा व्यवस्था की अनदेखी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मृत बच्चियों की पहचान स्थानीय निवासी छेदी राय की बेटियों चंदन कुमारी और कोमल कुमारी के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि दोनों बहनें गुरुवार शाम गांव की अन्य बच्चियों के साथ नहाने के लिए महराजी चौर गई थीं। उस समय किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही देर में यह खुशी का पल मातम में बदल जाएगा।

स्थानीय लोगों के अनुसार शाम करीब चार से पांच बजे के बीच गांव की पांच बच्चियां पानी से भरे एक बड़े गड्ढे में स्नान कर रही थीं। इसी दौरान अचानक उनका पैर फिसल गया और वे गहरे पानी में चली गईं। बच्चियां खुद को बचाने के लिए चीखने-चिल्लाने लगीं। आसपास मौजूद लोगों ने जब आवाज सुनी तो अफरा-तफरी मच गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक उसी समय पास में भैंस चरा रहे एक चरवाहे ने बच्चियों की चीख सुनी और बिना देर किए पानी में छलांग लगा दी। चरवाहे ने अपनी जान जोखिम में डालकर बच्चियों को बचाने की कोशिश की। काफी मशक्कत के बाद वह तीन बच्चियों को सुरक्षित बाहर निकालने में सफल रहा, लेकिन दो बहनों को नहीं बचाया जा सका।

कुछ देर बाद ग्रामीणों की मदद से दोनों बच्चियों को पानी से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। परिवार के लोग तुरंत उन्हें अस्पताल ले जाने की तैयारी करने लगे, लेकिन दोनों की मौत हो चुकी थी। घटना की खबर फैलते ही पूरे गांव में चीख-पुकार मच गई।

ग्रामीणों का कहना है कि जिस गड्ढे में यह हादसा हुआ, वह जेसीबी मशीन से मिट्टी कटाई के कारण बना था। आरोप है कि इलाके में लंबे समय से मिट्टी खनन का काम चल रहा था, जिससे कई जगह बड़े और गहरे गड्ढे बन गए हैं। बारिश और आसपास का पानी जमा होने से ये गड्ढे तालाब जैसे दिखाई देने लगे हैं और अब लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन पर भी लापरवाही का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार ऐसे खतरनाक गड्ढों को भरवाने की मांग की गई, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा उपाय किए गए होते तो शायद दो मासूम बच्चियों की जान बच सकती थी।

घटना की सूचना मिलते ही वारिसनगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का जायजा लिया और दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और सभी पहलुओं पर जानकारी जुटाई जा रही है।

हादसे के बाद गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव की महिलाएं लगातार बच्चियों की मां को सांत्वना देने में लगी हुई हैं। आसपास के लोग भी इस दर्दनाक घटना से सदमे में हैं। हर किसी की जुबान पर यही सवाल है कि आखिर इन जानलेवा गड्ढों के लिए जिम्मेदार कौन है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार के कई जिलों में अवैध मिट्टी खनन और जेसीबी से अंधाधुंध कटाई के कारण इस तरह के हादसे लगातार सामने आते रहे हैं। बारिश के मौसम में पानी भरने के बाद ये गड्ढे और भी खतरनाक हो जाते हैं। बच्चों और ग्रामीणों को इनके बारे में जानकारी नहीं होने से दुर्घटनाएं बढ़ जाती हैं।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इलाके में बने सभी खतरनाक गड्ढों को तुरंत भरवाया जाए और अवैध मिट्टी कटाई पर सख्त कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में और भी बड़े हादसे हो सकते हैं।

यह घटना सिर्फ एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है। गांवों में बिना सुरक्षा मानकों के हो रही मिट्टी कटाई और प्रशासनिक लापरवाही अब मासूम जिंदगियों पर भारी पड़ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए ताकि दोबारा कोई परिवार इस तरह का दर्द न झेले।

फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। वहीं गांव में शोक का माहौल बना हुआ है और लोग बच्चियों को याद कर भावुक हो रहे हैं।

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